Monday, October 4, 2010

सांस है विश्वास है ,
आस है किरण भोर की आएगी ,
नये सवेरे को तलाशती,
आँखें नम न करो ,
गहरे अँधेरे के बीच कहीं दूर,
सूर्य प्रकट होने को है!!
थककर मत बैठो ,
कुछ और कदम चलो,
मुठियाँ कास लो ,
सीर आसमान की ओर उठायो,
आँख से आंसूं घिरने न दो,
उस पार से आती आवाज़ ,
सुनो जोह तुम्हे लक्ष्य की ओर,
बढ़ने के लिए पुकार रही है,
ओह्ह राही !मंजिल दूर नहीं,
दूर नहीं ,दूर नहीं है !!!


(हरिवंश राइ बच्चन )

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